विकास के नाम पर कृषि का विनाश-
* सरकारें बड़े कल कारखानों के नाम पर प्रकृति और कृषि का विनाश कर रही है।
* इन उद्योगों से उतना रोजगार सृजन नहीं होता जितना लघु उद्योगो से होता है।
* पूँजीपतियों से कमीशन खाकर सरकारे इनको किसानों की उपजाऊ जमीने कौड़ियों के भाव बेच देती है।
* ये कल कारखाने पर्यावरण के लिए अत्यधिक घातक हैं, हमारी सभी नदियो का विनाश इन्ही वृहद कारखानो के कारण हुआ है।
* बड़ी बड़ी परियोजनाओ के नाम पर ठेकेदारो को फायदा पहुँचाने का षड्यंत्र होता है, जैसे की उत्तर प्रदेश मे शहरो की सड़कों का तो हाल बेहाल है, फिर एक्सप्रेस way की क्या जरूरत आन पड़ी।
* ये सरकारें तो राजशाही से भी गई गुजरी है, सोचते है, कि पाँच साल मिले है, जैसे भी लूट सको, जितना भी लूट सको लूट लो।
* इंडस्ट्रीज़ तो अनउपजाऊ भूमि पर भी बनाई जा सकती है, उपजाऊ भूमि तो सीमित है, फिर कृषि योग्य भूमि कैसे और किसी को दी जा सकती है ?
* विकास के नाम पर ये भूमि, जल , वायु सबको नाश कर देंगे, तब विकास को क्या सिर पर सजाओगे ?
No comments:
Post a Comment